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महिला दिवस औऱ रोजमर्रा की औरतों की जिंदगी ।

  महिला दिवस  औऱ  रोजमर्रा की औरतों की जिंदगी । आज 8 मार्च अंतराष्ट्रीय महिला दिवस हैं । सर्वप्रथम आप सभी को महिला दिवस की  हार्दिक शुभकामनाएं । महिलाओं की हम सभी के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। महिलाओं के महत्व को शब्दों में वर्णित कर पाना बहुत कठिन कार्य है ।  महिलाएं ही हैं जो समाज को चलाती हैं। एक महिला एक समाज का एक अभिन्न अंग हैं जिसके बिना प्रकृति की सुंदरता की सोभा हैं ।  सभी जानते है आज 8 मार्च  महिला दिवस है , देश के गाँव के हर कोने -कोने में  इस अवसर पे महिलाओं को सम्मानित किया जाता हैं । हर एक नागरिक आज के दिन सभी महिला को सम्मान देते हैं । उनके लिए तरह- तरह के उपहार लाते हैं । विद्यालय , कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । पहला महिला दिवस वर्ष 1900 में शुरू हुआ और उस समय इसे स्‍त्री और पुरुषों में मौजूद भेदभाव को खत्‍म करने के लिए मनाया गया था।  ये सब बस महिला दिवस के दिन होती हैं । लेकिन बाकी के दिनों में ऐसा भी होता क्या ? नही एक तरफ महिला दिवस के दिन महिलाओं को सम्मानित करते हैं , उपहार देते हैं । उन्हें प्रे...

अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ...

अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ...  न बोलना हैं  किसी से , न कहना है कुछ किसी से ,  न रुकना कही पे , न थकना हैं कभी भी । अपने सपने को पूरा करने में  जी जान लगा देना है ।। जिंदगी में  रास्ता हमें  कभी नही मोड़ना  दुनियां से नाता हमे  कभी नही तोड़ना  हम नारी है  बहुत शक्तिशाली  है , इस दुनियां में  काफी  बलशाली है , अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ।। रोक सके हमे  कोई जज्बात , वैसा दम कहाँ तूफानों में , बूझा  सके मेरे  सपने का चिराग़ ,  ऐसा हिम्मत  कहाँ  हवाओ में , लड़ना है खुद से खुद के लिए ,  बनना है कुछ दुनियां के लिए, अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ।। समय लगे चाहे जितना , मुह नही मोड़ना है मंजिल से , डरना नहीं है राहो पे , हारना नही है दुनियां दानवीरों से , संयम से काम लेना है , खूद को मजबूत बनाना है , अपने सपने को पुरा करने में जी जान लगा देना हैं ।।। जब तक पूरे न हो जाये सपने , तबतक चैन से नही बैठना है , मन जो ठान लिए उसे पूरा करना है , रचकर एक नय...

एक स्वतंत्र नारी और समाज .....

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 एक स्वतंत्र नारी और समाज ..... हमारा समाज आज  21वी० सदी में जी तो रहे  है , लेकिन हमारे समाज मे दोहरी मानसिकता वाले पुरुषों के कारण  आज  भी हम औरतों को एक वस्तु के रूप में माना जाता हैं । हमारे समाज दोहरी रीति रिवाजों के कारण आज लड़किया अपने आप को एक आजादी की जीवन नही जी रहे है । देश आजाद तो  हो गई , लेकिन स्त्रियां अभी तक आजाद नही हुई हैं ।  जब एक लड़की अपने पाव पे खड़ा होने चाहती हैं , तो उसे घर की परदा में छिपाया जाता हैं । उसे बस इतना ही बताया जाता , कि वो एक औरत हैं , उसे घर के चार दिवारी में ही रहना है । और अपनी पति की सेवा करना है । आखिर क्यों ?  क्या हमें  अपने जीवन जीने का हक नहीं हैं , क्यों औरतों को हर दिन हर- जगह हर -मोड़ पे प्रताड़ित किया जाता हैं । उसे बस गृहणी के रूप मे माना जाता हैं । हम हर जगह महिलाओं के सुरक्षा की बात करते हैं । और खुद उसे सुरक्षा प्रदान नही करते हैं । जब कोई लड़की सपना देखती है । अपने भविष्य के लिए अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दिन- रात  मेहनत करना चाहतीं है । तो उसे समाज मे गलत नजरो से देखा जाता हैं । ...

सोचती हूं हर-पल क्या यही मेरी कहानी है .....

  सोचती हूं हर-पल  क्या यही   मेरी कहानी है ..... बनते बिगड़ते हालातो से ,  खुद को संभालना सीखती हूँ । हर रोज एक नया पन्ना ,  जिंदगी की किताब में जोड़ती हुँ । सोचती हूँ हर -पल क्या यही मेरी कहानी हैं ।। हर शुबह एक नया सवेरा आती हैं । हर शाम को सूरज ढल जाती हैं ।। गमो के इस शहर में खुशियों की तलाश करती हूँ ।  जैसे तड़पते मछ्ली पानी की खोज में रहती हैं ।। सोचती हूं हर -पल क्या यही मेरी कहानी हैं ।। कभी थक जाती हूं , किसी राह पे , रुक जाती हूं ,  लेकिन हौसला कभी नही हारती हूं।  हर मुश्किलो का सामना एक प्यारी सी मुस्कान से करती हूँ। सोचती हर -पल क्या यही मेरी कहानी  हैं । मनीषा कुमारी  विरार ( महाराष्ट्रा )

दोस्त तुम न होते तो हम न होते

 दोस्त तुम न होते तो हम न होते ... अनजान थे एक -दूजे से हम , न नाम पता थी न गाँव , धीरे -धीरे समय गुज़रती गई , और ,हमदोनों एक दूसरे के जान है अब  दोस्त तुम न होते तो हम न होते ,  न पसंद मालूम थी , न ख्वाइश  हर पल होती थी कुछ नुमाइश  लेकिन हमारी दोस्ती ने रंग लायी  पूरी दुनिया मे नाम कमाई । दोस्त तुम न होते तो हम न होते जब भी हम अकेले होते हैं । तो तुम साथ हमारा देते हो।। कभी भी हमे अलग महसूस न होने देती हो  हर पल साथ निभाती हो । न कभी खुदगर्ज बने , न कभी स्वार्थी बने , हर -पल एक -दुजे के साथी बने , सच मे दोस्त तुम न होते तो हम न होते  जब हम थक हार जाती हु,  जीवन की नैया में,  तब तुम मेरा हाथ थाम के आगे बढ़ना सिखाती हो , कभी रात भर जागकर , तो कभी भुखे रहकर , तुम हमे जीवन जीना सिखाती हो । तुम्हारे बिना हम इस दुनियां के भीड़ में , जी नही पाएँगे मेरे दोस्त, कभी छोड़कर न जाना , इस प्यार की रिश्तों को तोड़कर न जाना | हर परेशानियों से खुद को मजबूत   करना सिखाती हो , हर रोज एक नयी चुनौती का सामना करना बताती हो । कभी लड़ कर , कभी डट कर  ...

राष्ट्र सेवा का हिस्सा बनु ...

  राष्ट्र  सेवा का  हिस्सा बनूँ....... रूढ़िवादी प्रथाएं न रोके हमे ,  मूढ़सी मान्यताये न टोके हमे,  सदा हम सही मार्ग पर ही चले , जिंदगी भर निरन्तर दीये सा जले । हर समय हम किसी की भलाई करे , जिंदगी में न कोई बुराई करे ,  विश्व के लिए  एक  उदाहरण बनूँ ।  ऐसे ही  आदर्श  पद  नारी बनूँ ।। अशिक्षा , हिंसा , अधर्म से लडू,  न्याय के प्रश्न में अचल बन अडूं ,  सत्य के साथ हमेशा रहूँ, ग़लत का विरोध हमेशा करूँ। सुविचार से भरा मेरा ब्यवहार हो ,  आचरण का हमे श्रेष्ठ आधार हो ,  एक नए भारत युग के लिए हम ढले ,  जिंदगी भर निरन्तर नदियों सा बहे ।। जहाँ चार दीवारों में , ज्ञान  ही नही  साथ भविष्य भी पढ़ाई जाती है । उसी पद को लेकर किसी आशय का किस्सा बनूँ । अहंकार न छुए मुझे लेकिन गर्व का एक प्रतीक बनूं ।। किताबों के बाते तो ज्ञान बनकर , हर जगह लहराया करती हैं ।। मैं जुगनु बस उस जीवन की जो छात्र की सोच को उजागर करती हैं ।। जिंदगी को प्रकाशित करने में अटुट प्रयास करूँ। अंधियारा से बिना डरे बिना रुके आगे बढूं। मैं प्रभा...

बेटी नही जान हैं , वो मेरी

 बेटी नहीं जान हैं , वो मेरी  बेटी नही जान है , वो मेरी । दिल की धड़कन की आवाज है,  वो मेरी ।। ईस्वर का दिया हुआ उपहार हैं , वो मेरी । बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।। अपने पापा की परी ,माँ की लाडली है। हर काम मे हमारी एक सच्ची -साथी हैं । हमारी जिंदगी को खुशियों से भरने वाली , बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।। हर गम को अपना दर्द समझती हैं । हर खुशी को दुगुनी कर देती ,  हर रिश्ते को प्रेम से सींचने वाली । बेटी नही जान है , वो मेरी ।। मनीषा कुमारी  विरार ( मुम्बई )

इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं

 *इंसानियत कहीं अब खो सी गई हैं ।* अपनी जिंदगी अब  सबको प्यारी हो गयी है । रिश्ते में अब प्यार नही ,एक -दूसरे पर विश्वास नही , सबके चेहरे के कई रंग हो गए हैं ,  त्याग औऱ बलिदान कही गुम हो गए  हैं। इंसानियत कही अब खो सी गई है ।। क्या मिला है एक -दूसरे से जीतकर , जब अपनो के सामने ही हार गये हैं । पिता -पुत्र में अब पैसो का रिश्ता हैं । माँ-बेटी में न पहले जैसा नाता है । । हर कोई एक -दूसरे के खून के प्यासे है । इंसानियत कही अब खो सी गई हैं ।।। दौलत के भूखे सब हो गए हैं ।  खुद की जिम्मेदारी को भी भूल गए हैं। जिस माता -पिता ने हमे चलना सिखाया ,  जिसने हमे इस काबिल बनाया ,  सही गलत का पाठ पढ़ाया ,  दुनिया की रिवाजो कि पहचान कराया । आज वही बृद्धाश्रम के हवाले हो गए है । इंसानियत कही अब खो सी गई है। सबकुछ जीवन में अब तो चारदिवारी हो गयी है । माँ -बाप ,भाई -बहन सब मतलब के रिश्ते हो गये हैं।। शायद जानवरो सीे नस्ले हमारी हो गयी हैं । इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं ।। बड़ो के पाँव छूने में अब शर्म आने लगी हैं । दूर से हेलो कहकर नमस्ते होने लगी हैं ।। दौलत की दीव...

ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी

 ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी ..... मुझे नहीं पता  ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी । आ तो गयी इस दुनिया में क्या उम्र भर जी पाउंगी।। कैसे खुद के  अपने  सपने पूरे कर पाऊँगी । मुझे नहीं पता जिन्दगी  किस मोड़ पे ले जाएगी ।। मुझे नही पता  जिंदगी भर संघर्ष कर भी पाऊंगी । कैसे इन राक्षस  दरिंदो से बच कर घर आऊंगी । हो सकता है हमे बीच रास्ते में ही कोई हवस के भूखे मिल जाये । कैसे उनसे ख़ुद को सुरक्षित महफूज़ कर पाऊँगी।। मैं नहीं करती  ऐसी बाते साथ मरने जीने जैसे वादे। तुम भी कोई उम्मीद मत रखना क्या पता कब उन  दरिंदो के शिकार हो जाऊंगी । तुम रोना नही अगर तेरा  दिल दुखा जाऊंगी।। मन में तेरे हजार सपने  रहे होंगे मेंरे लिए  ,पर माफ करना उन्हें  पूरा भी नहीं कर पाऊंगी। साथ तेरे ना चल पाऊंगी माँ , बीच रास्ते में ही तुझे छोड़ जाऊंगी । मुझे माफ़ करना अगर मैं तेरी प्यारी बेटी न बन पाऊँगी ।। क्या पता किसके हाथो कब जिन्दा जल जाऊंगी।। मुझे बेवफा मत समझना -2  हमेशा दिल में अपने मुझे जिंदा रखना।। बातें तो बहुत सी कहनी है ,पर कह नहीं पाऊँगी । मेरे जन्मदाता...

हमारे जीवन में शिक्षक का महत्व

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  शिक्षक दिवस की  हार्दिक शुभकामनाएं  शिक्षक हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।  शिक्षक दिवस के अवसर पर हमारे तरफ से सभी शिक्षको हमारा प्रणाम ।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता हैं। भारत में शिक्षक दिवस हर वर्ष 5 सितम्बर  को  मनाया जाता है। इस दिन भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत योगदान  दिए  है। उनका कहना था कि “यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाए तो समाज की बुराईयों को मिटाया जा सकता है”। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।जिस तरह हमारे शरीर के अंगो मे से अगर आँखे न हो, तो पूरी दुनिया अँधेरा दिखाई देती हैं । उसी प्रकार हमारे जीवन मे अगर शिक्षक अपने ज्ञान से हमे प्रकाशित नहीं  करते तो पूरी दुनियां शून्य लगती  हैं ।हम आँख के द्वारा पूरी दुनियां तो देख सकते , लेकिन बिना ज्ञान हमारी जिंदगी अंधकारमय रहती हैं ।   हम शिक्षकों के  बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सक...

लोकमान्य तिलक

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💐🌺🥀🍂💐🌷💮🌸🌿🍃🍂🍁🍀💐🏵️ ( बाल गंगाधर तिलक 100वी ० स्मृति दिवस ) 💐 🙏✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️🙏 🌺आज हम इनके पुण्यतिथि पर उनके विचारों और इनके बारे मे  संक्षिप्त में कुछ जानकारियां आपलोगों के साथ शेयर कर रही । कृप्या जरूर पढ़ें । 🌺 बाल गंगाधर तिलक या लोकमान्य तिलक, उनका  मूल नाम केशव गंगाधर तिलक थी । इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। इ उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को ब्रिटिश भारत में वर्तमान महाराष्ट्र स्थित रत्नागिरी जिले के एक गाँव चिखली में हुआ था । उनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। उनकी माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर थी । उन्होंने 1871 में  तापीबाई से शादी की जो बाद में सत्यभामाबाई के रूप में प्रख्यात हुई थी। आज के दिन ही उनकी  मृत्यु  थोड़े वक्त तक बीमार रहने के बाद 1 अगस्त, 1920 में तिलक का बॉम्बे (मुंबई) में निधन हो गया. उस वक्त उनकी उम्र 64 साल थी. उनके अंतिम संस्कार में दस लाख से अधिक लोग शामिल हुए. शोकाकुल महात्मा गांधी ने अपने अखबार 'यंग इंडिया' में लिखा, "एक विशाल व्यक्तित्व चला गया. एक शेर की आवाज़ शांत हो गई. ...