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Showing posts from January, 2021

राष्ट्र सेवा का हिस्सा बनु ...

  राष्ट्र  सेवा का  हिस्सा बनूँ....... रूढ़िवादी प्रथाएं न रोके हमे ,  मूढ़सी मान्यताये न टोके हमे,  सदा हम सही मार्ग पर ही चले , जिंदगी भर निरन्तर दीये सा जले । हर समय हम किसी की भलाई करे , जिंदगी में न कोई बुराई करे ,  विश्व के लिए  एक  उदाहरण बनूँ ।  ऐसे ही  आदर्श  पद  नारी बनूँ ।। अशिक्षा , हिंसा , अधर्म से लडू,  न्याय के प्रश्न में अचल बन अडूं ,  सत्य के साथ हमेशा रहूँ, ग़लत का विरोध हमेशा करूँ। सुविचार से भरा मेरा ब्यवहार हो ,  आचरण का हमे श्रेष्ठ आधार हो ,  एक नए भारत युग के लिए हम ढले ,  जिंदगी भर निरन्तर नदियों सा बहे ।। जहाँ चार दीवारों में , ज्ञान  ही नही  साथ भविष्य भी पढ़ाई जाती है । उसी पद को लेकर किसी आशय का किस्सा बनूँ । अहंकार न छुए मुझे लेकिन गर्व का एक प्रतीक बनूं ।। किताबों के बाते तो ज्ञान बनकर , हर जगह लहराया करती हैं ।। मैं जुगनु बस उस जीवन की जो छात्र की सोच को उजागर करती हैं ।। जिंदगी को प्रकाशित करने में अटुट प्रयास करूँ। अंधियारा से बिना डरे बिना रुके आगे बढूं। मैं प्रभा...

बेटी नही जान हैं , वो मेरी

 बेटी नहीं जान हैं , वो मेरी  बेटी नही जान है , वो मेरी । दिल की धड़कन की आवाज है,  वो मेरी ।। ईस्वर का दिया हुआ उपहार हैं , वो मेरी । बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।। अपने पापा की परी ,माँ की लाडली है। हर काम मे हमारी एक सच्ची -साथी हैं । हमारी जिंदगी को खुशियों से भरने वाली , बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।। हर गम को अपना दर्द समझती हैं । हर खुशी को दुगुनी कर देती ,  हर रिश्ते को प्रेम से सींचने वाली । बेटी नही जान है , वो मेरी ।। मनीषा कुमारी  विरार ( मुम्बई )

इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं

 *इंसानियत कहीं अब खो सी गई हैं ।* अपनी जिंदगी अब  सबको प्यारी हो गयी है । रिश्ते में अब प्यार नही ,एक -दूसरे पर विश्वास नही , सबके चेहरे के कई रंग हो गए हैं ,  त्याग औऱ बलिदान कही गुम हो गए  हैं। इंसानियत कही अब खो सी गई है ।। क्या मिला है एक -दूसरे से जीतकर , जब अपनो के सामने ही हार गये हैं । पिता -पुत्र में अब पैसो का रिश्ता हैं । माँ-बेटी में न पहले जैसा नाता है । । हर कोई एक -दूसरे के खून के प्यासे है । इंसानियत कही अब खो सी गई हैं ।।। दौलत के भूखे सब हो गए हैं ।  खुद की जिम्मेदारी को भी भूल गए हैं। जिस माता -पिता ने हमे चलना सिखाया ,  जिसने हमे इस काबिल बनाया ,  सही गलत का पाठ पढ़ाया ,  दुनिया की रिवाजो कि पहचान कराया । आज वही बृद्धाश्रम के हवाले हो गए है । इंसानियत कही अब खो सी गई है। सबकुछ जीवन में अब तो चारदिवारी हो गयी है । माँ -बाप ,भाई -बहन सब मतलब के रिश्ते हो गये हैं।। शायद जानवरो सीे नस्ले हमारी हो गयी हैं । इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं ।। बड़ो के पाँव छूने में अब शर्म आने लगी हैं । दूर से हेलो कहकर नमस्ते होने लगी हैं ।। दौलत की दीव...

ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी

 ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी ..... मुझे नहीं पता  ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी । आ तो गयी इस दुनिया में क्या उम्र भर जी पाउंगी।। कैसे खुद के  अपने  सपने पूरे कर पाऊँगी । मुझे नहीं पता जिन्दगी  किस मोड़ पे ले जाएगी ।। मुझे नही पता  जिंदगी भर संघर्ष कर भी पाऊंगी । कैसे इन राक्षस  दरिंदो से बच कर घर आऊंगी । हो सकता है हमे बीच रास्ते में ही कोई हवस के भूखे मिल जाये । कैसे उनसे ख़ुद को सुरक्षित महफूज़ कर पाऊँगी।। मैं नहीं करती  ऐसी बाते साथ मरने जीने जैसे वादे। तुम भी कोई उम्मीद मत रखना क्या पता कब उन  दरिंदो के शिकार हो जाऊंगी । तुम रोना नही अगर तेरा  दिल दुखा जाऊंगी।। मन में तेरे हजार सपने  रहे होंगे मेंरे लिए  ,पर माफ करना उन्हें  पूरा भी नहीं कर पाऊंगी। साथ तेरे ना चल पाऊंगी माँ , बीच रास्ते में ही तुझे छोड़ जाऊंगी । मुझे माफ़ करना अगर मैं तेरी प्यारी बेटी न बन पाऊँगी ।। क्या पता किसके हाथो कब जिन्दा जल जाऊंगी।। मुझे बेवफा मत समझना -2  हमेशा दिल में अपने मुझे जिंदा रखना।। बातें तो बहुत सी कहनी है ,पर कह नहीं पाऊँगी । मेरे जन्मदाता...