लोकमान्य तिलक
💐🌺🥀🍂💐🌷💮🌸🌿🍃🍂🍁🍀💐🏵️ ( बाल गंगाधर तिलक 100वी ० स्मृति दिवस ) 💐
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🌺आज हम इनके पुण्यतिथि पर उनके विचारों और इनके बारे मे संक्षिप्त में कुछ जानकारियां आपलोगों के साथ शेयर कर रही । कृप्या जरूर पढ़ें । 🌺
बाल गंगाधर तिलक या लोकमान्य तिलक, उनका मूल नाम केशव गंगाधर तिलक थी । इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। इ उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को ब्रिटिश भारत में वर्तमान महाराष्ट्र स्थित रत्नागिरी जिले के एक गाँव चिखली में हुआ था ।
उनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे।
उनकी माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर थी । उन्होंने 1871 में तापीबाई से शादी की जो बाद में सत्यभामाबाई के रूप में प्रख्यात हुई थी।
आज के दिन ही उनकी मृत्यु थोड़े वक्त तक बीमार रहने के बाद 1 अगस्त, 1920 में तिलक का बॉम्बे (मुंबई) में निधन हो गया. उस वक्त उनकी उम्र 64 साल थी. उनके अंतिम संस्कार में दस लाख से अधिक लोग शामिल हुए. शोकाकुल महात्मा गांधी ने अपने अखबार 'यंग इंडिया' में लिखा, "एक विशाल व्यक्तित्व चला गया. एक शेर की आवाज़ शांत हो गई. तिलक ने जिस तन्मयता और आग्रह से स्वराज की अविरल गाथा सुनाई वैसा कोई नहीं कर पाया."। वो एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। वो अपने परिश्रम के बल पर विद्यालय के मेधावी छात्रों में उनकी गिनती होती थी।सन् 1879 में उन्होंने बी.ए. तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण किये थे । उन्होंने सन् 1880 में न्यू इंग्लिश स्कूल और कुछ साल बाद फर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना की थी । वो एक आधुनिक भारत के प्रधान आर्किटेक्ट में से एक थे। उनके अनुयायियों ने उन्हें ' लोकमान्य 'की उपाधि दी थी । उन्होंने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में बहुत सहायता की और उन्होंने 'इंडियन होमरूल लीग' की स्थापना सन् 1914 ई. किये थे । भारतीयों की दशा में सुधार करने और लोगों को जागरुक करने के लिये उन्होंने पत्रिकाओं का प्रकाशन किया। उन्होंने अपने सहयोगियों के संयुक्त हस्ताक्षरों के साथ ‘केसरी’का घोषणापत्र प्रकाशित किये थे । उन्होंने लीग के उद्देश्यों को स्पष्ट करने के लिये लगभग 100 से भी ज्यादा सभाओं का आयोजन किये थे । और 1919 में जलियावाला बाग हत्या कांड की इन्होंने अपने लेखों के माध्यम से आलोचना किये और बहिष्कार के आन्दोलन को जारी रखने की अपील किये थे । वो कहते थे सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है लेकिन ये भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने की शक्ति नहीं है।लोकमान्य तिलक जी ने जनजागृति का कार्यक्रम पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में गणेश उत्सव तथा शिवाजी उत्सव सप्ताह भर मनाना प्रारंभ किया। इन त्योहारों के माध्यम से जनता में देशप्रेम और अंग्रेजों के अन्यायों के विरुद्ध संघर्ष का साहस भरे ।
उनके कूछ प्रमुख नारों में एक नारा जो काफी लोकप्रिय और प्रसिद्ध हुआ वो थी स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, इसे मैं लेकर ही रहुँगा।👈
उनके कुछ अनमोल वचन थे । जो कि आप निचे पढ़ेंगे 👇✍️🍂
० मानव प्रकृति ही ऐसी है की हम बिना उत्सवों के नहीं रह सकते! उत्सव प्रिय होना मानव स्वाभाव है! हमारे त्यौहार होने ही चाहियें..”
० यदि हम किसी भी देश के इतिहास के अतीत में जाएं, तो हम अंत में मिथकों और परम्पराओं के काल में पहुंच जाते हैं जो आखिरकार अभेद्य अन्धकार में खो जाता है।
🥀आप केवल कर्म करते जाइए, उसके फल की चिन्ता मत कीजिये..”🥀
🌹प्रातः काल में उदय होने के लिए ही सूरज संध्या काल के अंधकार में डूब जाता है और अंधकार में जाए बिना प्रकाश प्राप्त नहीं हो सकता।🌹
🏵️कमजोर ना बनें, शक्तिशाली बनें और यह विश्वास रखें की भगवान हमेशा आपके साथ है।🏵️
उनके स्मृति दिन के अवसर पर हमारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवम कोटि - कोटि नमन । 🙏🙏🙏🙏
आशा करती हुँ आपको ये जानकारी पसंद आई होगी ।
By
Student- teacher
Name- Manisha kumari .
Roll no -19.
P.V.D.T.College Of Education For Women ( S.N.D.T.women's University )
🙏🌺धन्यवाद🌺🙏

बहुत ही अच्छी बाते कही है आप
ReplyDeleteVery nice
🙏🙏🙏🙏
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DeleteVery very nice 🙏🙏🙏
ReplyDeleteGreat information 🙏👌👌
ReplyDeleteVery nice lines 🙏🙏🙏👌👌👌👌
ReplyDeleteLines which is mentioned in this very inspiring and informative and also it teaches us Many lessons of life and gives positivity.
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteYou have a very beautiful idea 👍👍
Excellent 👍
ReplyDeleteExcellent written by Manisha
ReplyDeleteVery nice 👏
ReplyDeleteVery nice 🌹🌹💐💐
ReplyDeleteVery nice 🌹🌹💐💐
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