दोस्त तुम न होते तो हम न होते

 दोस्त तुम न होते तो हम न होते ...


अनजान थे एक -दूजे से हम ,

न नाम पता थी न गाँव ,

धीरे -धीरे समय गुज़रती गई ,

और ,हमदोनों एक दूसरे के जान है अब 

दोस्त तुम न होते तो हम न होते , 


न पसंद मालूम थी , न ख्वाइश 

हर पल होती थी कुछ नुमाइश 

लेकिन हमारी दोस्ती ने रंग लायी 

पूरी दुनिया मे नाम कमाई ।

दोस्त तुम न होते तो हम न होते


जब भी हम अकेले होते हैं ।

तो तुम साथ हमारा देते हो।।

कभी भी हमे अलग महसूस न होने देती हो 

हर पल साथ निभाती हो ।


न कभी खुदगर्ज बने ,

न कभी स्वार्थी बने ,

हर -पल एक -दुजे के साथी बने ,

सच मे दोस्त तुम न होते तो हम न होते 


जब हम थक हार जाती हु, 

जीवन की नैया में, 

तब तुम मेरा हाथ थाम के आगे बढ़ना सिखाती हो ,

कभी रात भर जागकर ,

तो कभी भुखे रहकर ,

तुम हमे जीवन जीना सिखाती हो ।


तुम्हारे बिना हम इस दुनियां के भीड़ में ,

जी नही पाएँगे मेरे दोस्त,

कभी छोड़कर न जाना ,

इस प्यार की रिश्तों को तोड़कर न जाना |



हर परेशानियों से खुद को मजबूत   करना सिखाती हो ,

हर रोज एक नयी चुनौती का सामना करना बताती हो ।

कभी लड़ कर , कभी डट कर  ,

हमेशा आगे बढ़ना सिखती हो।

दोस्त तुम न होते , तो हम न होते ..


मनीषा कुमारी 

विरार ( महाराष्ट्र )

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