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Showing posts from February, 2021

अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ...

अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ...  न बोलना हैं  किसी से , न कहना है कुछ किसी से ,  न रुकना कही पे , न थकना हैं कभी भी । अपने सपने को पूरा करने में  जी जान लगा देना है ।। जिंदगी में  रास्ता हमें  कभी नही मोड़ना  दुनियां से नाता हमे  कभी नही तोड़ना  हम नारी है  बहुत शक्तिशाली  है , इस दुनियां में  काफी  बलशाली है , अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ।। रोक सके हमे  कोई जज्बात , वैसा दम कहाँ तूफानों में , बूझा  सके मेरे  सपने का चिराग़ ,  ऐसा हिम्मत  कहाँ  हवाओ में , लड़ना है खुद से खुद के लिए ,  बनना है कुछ दुनियां के लिए, अपने सपने को पूरा करने में जी जान लगा देना है ।। समय लगे चाहे जितना , मुह नही मोड़ना है मंजिल से , डरना नहीं है राहो पे , हारना नही है दुनियां दानवीरों से , संयम से काम लेना है , खूद को मजबूत बनाना है , अपने सपने को पुरा करने में जी जान लगा देना हैं ।।। जब तक पूरे न हो जाये सपने , तबतक चैन से नही बैठना है , मन जो ठान लिए उसे पूरा करना है , रचकर एक नय...

एक स्वतंत्र नारी और समाज .....

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 एक स्वतंत्र नारी और समाज ..... हमारा समाज आज  21वी० सदी में जी तो रहे  है , लेकिन हमारे समाज मे दोहरी मानसिकता वाले पुरुषों के कारण  आज  भी हम औरतों को एक वस्तु के रूप में माना जाता हैं । हमारे समाज दोहरी रीति रिवाजों के कारण आज लड़किया अपने आप को एक आजादी की जीवन नही जी रहे है । देश आजाद तो  हो गई , लेकिन स्त्रियां अभी तक आजाद नही हुई हैं ।  जब एक लड़की अपने पाव पे खड़ा होने चाहती हैं , तो उसे घर की परदा में छिपाया जाता हैं । उसे बस इतना ही बताया जाता , कि वो एक औरत हैं , उसे घर के चार दिवारी में ही रहना है । और अपनी पति की सेवा करना है । आखिर क्यों ?  क्या हमें  अपने जीवन जीने का हक नहीं हैं , क्यों औरतों को हर दिन हर- जगह हर -मोड़ पे प्रताड़ित किया जाता हैं । उसे बस गृहणी के रूप मे माना जाता हैं । हम हर जगह महिलाओं के सुरक्षा की बात करते हैं । और खुद उसे सुरक्षा प्रदान नही करते हैं । जब कोई लड़की सपना देखती है । अपने भविष्य के लिए अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दिन- रात  मेहनत करना चाहतीं है । तो उसे समाज मे गलत नजरो से देखा जाता हैं । ...

सोचती हूं हर-पल क्या यही मेरी कहानी है .....

  सोचती हूं हर-पल  क्या यही   मेरी कहानी है ..... बनते बिगड़ते हालातो से ,  खुद को संभालना सीखती हूँ । हर रोज एक नया पन्ना ,  जिंदगी की किताब में जोड़ती हुँ । सोचती हूँ हर -पल क्या यही मेरी कहानी हैं ।। हर शुबह एक नया सवेरा आती हैं । हर शाम को सूरज ढल जाती हैं ।। गमो के इस शहर में खुशियों की तलाश करती हूँ ।  जैसे तड़पते मछ्ली पानी की खोज में रहती हैं ।। सोचती हूं हर -पल क्या यही मेरी कहानी हैं ।। कभी थक जाती हूं , किसी राह पे , रुक जाती हूं ,  लेकिन हौसला कभी नही हारती हूं।  हर मुश्किलो का सामना एक प्यारी सी मुस्कान से करती हूँ। सोचती हर -पल क्या यही मेरी कहानी  हैं । मनीषा कुमारी  विरार ( महाराष्ट्रा )

दोस्त तुम न होते तो हम न होते

 दोस्त तुम न होते तो हम न होते ... अनजान थे एक -दूजे से हम , न नाम पता थी न गाँव , धीरे -धीरे समय गुज़रती गई , और ,हमदोनों एक दूसरे के जान है अब  दोस्त तुम न होते तो हम न होते ,  न पसंद मालूम थी , न ख्वाइश  हर पल होती थी कुछ नुमाइश  लेकिन हमारी दोस्ती ने रंग लायी  पूरी दुनिया मे नाम कमाई । दोस्त तुम न होते तो हम न होते जब भी हम अकेले होते हैं । तो तुम साथ हमारा देते हो।। कभी भी हमे अलग महसूस न होने देती हो  हर पल साथ निभाती हो । न कभी खुदगर्ज बने , न कभी स्वार्थी बने , हर -पल एक -दुजे के साथी बने , सच मे दोस्त तुम न होते तो हम न होते  जब हम थक हार जाती हु,  जीवन की नैया में,  तब तुम मेरा हाथ थाम के आगे बढ़ना सिखाती हो , कभी रात भर जागकर , तो कभी भुखे रहकर , तुम हमे जीवन जीना सिखाती हो । तुम्हारे बिना हम इस दुनियां के भीड़ में , जी नही पाएँगे मेरे दोस्त, कभी छोड़कर न जाना , इस प्यार की रिश्तों को तोड़कर न जाना | हर परेशानियों से खुद को मजबूत   करना सिखाती हो , हर रोज एक नयी चुनौती का सामना करना बताती हो । कभी लड़ कर , कभी डट कर  ...