बेटी नही जान हैं , वो मेरी

 बेटी नहीं जान हैं , वो मेरी 


बेटी नही जान है , वो मेरी ।

दिल की धड़कन की आवाज है,  वो मेरी ।।

ईस्वर का दिया हुआ उपहार हैं , वो मेरी ।

बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।।


अपने पापा की परी ,माँ की लाडली है।

हर काम मे हमारी एक सच्ची -साथी हैं ।

हमारी जिंदगी को खुशियों से भरने वाली ,

बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।।


हर गम को अपना दर्द समझती हैं ।

हर खुशी को दुगुनी कर देती , 

हर रिश्ते को प्रेम से सींचने वाली ।

बेटी नही जान है , वो मेरी ।।


मनीषा कुमारी 

विरार ( मुम्बई )

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