बेटी नही जान हैं , वो मेरी
बेटी नहीं जान हैं , वो मेरी
बेटी नही जान है , वो मेरी ।
दिल की धड़कन की आवाज है, वो मेरी ।।
ईस्वर का दिया हुआ उपहार हैं , वो मेरी ।
बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।।
अपने पापा की परी ,माँ की लाडली है।
हर काम मे हमारी एक सच्ची -साथी हैं ।
हमारी जिंदगी को खुशियों से भरने वाली ,
बेटी नही जान हैं , वो मेरी ।।
हर गम को अपना दर्द समझती हैं ।
हर खुशी को दुगुनी कर देती ,
हर रिश्ते को प्रेम से सींचने वाली ।
बेटी नही जान है , वो मेरी ।।
मनीषा कुमारी
विरार ( मुम्बई )
Heart touching 💖💖
ReplyDeleteNice 👌
Right 👌👌
ReplyDeleteVery nice
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