इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं
*इंसानियत कहीं अब खो सी गई हैं ।*
अपनी जिंदगी अब सबको प्यारी हो गयी है ।
रिश्ते में अब प्यार नही ,एक -दूसरे पर विश्वास नही ,
सबके चेहरे के कई रंग हो गए हैं ,
त्याग औऱ बलिदान कही गुम हो गए हैं।
इंसानियत कही अब खो सी गई है ।।
क्या मिला है एक -दूसरे से जीतकर ,
जब अपनो के सामने ही हार गये हैं ।
पिता -पुत्र में अब पैसो का रिश्ता हैं ।
माँ-बेटी में न पहले जैसा नाता है । ।
हर कोई एक -दूसरे के खून के प्यासे है ।
इंसानियत कही अब खो सी गई हैं ।।।
दौलत के भूखे सब हो गए हैं ।
खुद की जिम्मेदारी को भी भूल गए हैं।
जिस माता -पिता ने हमे चलना सिखाया ,
जिसने हमे इस काबिल बनाया ,
सही गलत का पाठ पढ़ाया ,
दुनिया की रिवाजो कि पहचान कराया ।
आज वही बृद्धाश्रम के हवाले हो गए है ।
इंसानियत कही अब खो सी गई है।
सबकुछ जीवन में अब तो चारदिवारी हो गयी है ।
माँ -बाप ,भाई -बहन सब मतलब के रिश्ते हो गये हैं।।
शायद जानवरो सीे नस्ले हमारी हो गयी हैं ।
इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं ।।
बड़ो के पाँव छूने में अब शर्म आने लगी हैं ।
दूर से हेलो कहकर नमस्ते होने लगी हैं ।।
दौलत की दीवानी सारी दुनिया हो गयी हैं ।
इंसानियत कही अब खो सी गयी हैं ।।
ज्यादा कमाने की चाहत में सभी ,
खुद के फर्ज से अनजान हो गए हैं ,
जो हर एक साँस को जन्म देने वाली माँ ,
आज अपनी ही इज्जत की मोहताज की ,
बेचारी नारी हो गयी हैं ।
इंसानियत कही अब खो सी गई हैं ।
जिसने खुद भूखा रहकर ,
अपने बच्चों को कभी भूखा नही रखा ,
आज वो दो वक्त की रोटी की मोहताज हो गई हैं ।
इंसानियत अब कही खो सी गयी हैं ।
विद्यार्थी- शिक्षिका - (मनीषा कुमारी )
विरार ( महाराष्ट्र )
👍👍
ReplyDelete