ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी

 ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी .....

मुझे नहीं पता  ये जिंदगी कहाँ ले जाएगी ।

आ तो गयी इस दुनिया में क्या उम्र भर जी पाउंगी।।

कैसे खुद के  अपने  सपने पूरे कर पाऊँगी ।

मुझे नहीं पता जिन्दगी  किस मोड़ पे ले जाएगी ।।


मुझे नही पता  जिंदगी भर संघर्ष कर भी पाऊंगी ।

कैसे इन राक्षस  दरिंदो से बच कर घर आऊंगी ।

हो सकता है हमे बीच रास्ते में ही कोई हवस के भूखे मिल जाये ।

कैसे उनसे ख़ुद को सुरक्षित महफूज़ कर पाऊँगी।।


मैं नहीं करती  ऐसी बाते साथ मरने जीने जैसे वादे।

तुम भी कोई उम्मीद मत रखना क्या पता कब उन  दरिंदो के शिकार हो जाऊंगी ।

तुम रोना नही अगर तेरा  दिल दुखा जाऊंगी।।


मन में तेरे हजार सपने  रहे होंगे मेंरे लिए  ,पर माफ करना उन्हें  पूरा भी नहीं कर पाऊंगी।

साथ तेरे ना चल पाऊंगी माँ , बीच रास्ते में ही तुझे छोड़ जाऊंगी ।

मुझे माफ़ करना अगर मैं तेरी प्यारी बेटी न बन पाऊँगी ।।

क्या पता किसके हाथो कब जिन्दा जल जाऊंगी।।


मुझे बेवफा मत समझना -2  हमेशा दिल में अपने मुझे जिंदा रखना।।

बातें तो बहुत सी कहनी है ,पर कह नहीं पाऊँगी ।

मेरे जन्मदाता  , मैं साथ तेरे अब ना चल पाऊंगी,

चाहती हूं बिदाई तुमसे, पर ये कैसा अंत है जहां तुम्हें  आख़िरी बार देख भी ना पाऊंगी।

बीच रास्ते मे ही खुदा के प्यारे हो जाऊंगी ।



मनीषा कुमारी 

विरार (महाराष्ट्र)

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