एक स्वतंत्र नारी और समाज .....

 एक स्वतंत्र नारी और समाज .....



हमारा समाज आज  21वी० सदी में जी तो रहे  है , लेकिन हमारे समाज मे दोहरी मानसिकता वाले पुरुषों के कारण  आज  भी हम औरतों को एक वस्तु के रूप में माना जाता हैं । हमारे समाज दोहरी रीति रिवाजों के कारण आज लड़किया अपने आप को एक आजादी की जीवन नही जी रहे है । देश आजाद तो  हो गई , लेकिन स्त्रियां अभी तक आजाद नही हुई हैं ।  जब एक लड़की अपने पाव पे खड़ा होने चाहती हैं , तो उसे घर की परदा में छिपाया जाता हैं । उसे बस इतना ही बताया जाता , कि वो एक औरत हैं , उसे घर के चार दिवारी में ही रहना है । और अपनी पति की सेवा करना है । आखिर क्यों ? 



क्या हमें  अपने जीवन जीने का हक नहीं हैं , क्यों औरतों को हर दिन हर- जगह हर -मोड़ पे प्रताड़ित किया जाता हैं । उसे बस गृहणी के रूप मे माना जाता हैं । हम हर जगह महिलाओं के सुरक्षा की बात करते हैं । और खुद उसे सुरक्षा प्रदान नही करते हैं । जब कोई लड़की सपना देखती है । अपने भविष्य के लिए अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दिन- रात  मेहनत करना चाहतीं है । तो उसे समाज मे गलत नजरो से देखा जाता हैं ।   आज दुनिया मे लड़किया हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं , फिर हमारे समाज मे ऐसे मानसिकता वाले लोग बहुत है । हर तरफ हम महिला सशक्तिकरण  के  लिए नारे लगाए जाते हैं , भाषण दिए जाते हैं । लेकिन जबतक हम खुद को अपनी सोच नही बदलेंगे तबतक महिला सशक्तिकरण नही होंगी । जब बेटी माँ के गर्भ में आती तभी से सोचने लगती हैं , इस दुनिया मे आ भी  पाउंगी या नही , जब वो जन्म लेती हैं , उसे कोशा जाता है। तू बेटी है , अगर हम बेटी को जन्म नही देंगे तो हम पुरूष कहाँ से आएंगे । हर इंसान जानता है , अगर  औरत को लड़कियां होती हैं , उसमे उसका कोई गलती नहीं । क्योंकि लड़का या लड़की होना वो तो पुरुषों के सुक्राणु पे निर्भर होती हैं । फिर औरत को सजा दी जाती हैं , आखिर क्यों ?  जब वो पढ़ना चाहती है , आगे बढ़ना चाहती है , तो उसमें भेदभाव किया जाता है ।  औरतों को अपने इच्छाओं के अनुसार खाना , कपड़ा ये सब भी पूरी नही होती । हमेशा से हमारा समाज एक पुरूष प्रधान समाज को बढ़ावा दे रहा है । समाज में प्रत्येक पुरुष और औरतों को संविधान द्वारा समान तौर पर समस्त मूलभूत अधिकार दिए गए हैं, लेकिन फिर भी किसी न किसी रूप में सामाजिक रूढ़िवादी मान्यताओं और विषमताओं के कारण महिलाए  अपने अधिकारों से वंचित  हैं आज भी ।  लेकिन फिर भी लड़किया काफ़ी आगे बढ़ रही हैं । वो अपने सपने के लिए पूरी दुनिया से लड़ने की हिम्मत रखती हैं । लेकिन जब परिवार की साथ नही मिलती तो टूट जाती हैं । इसीलिए हमे अपनी मानसिकता जल्द बदलनी होगी । तभी हमारे घरों का विकास होगा।   क्योंकि परिवार  को कुशल संचालन में  महिलाओं की अग्रणी भूमिका  होती है। और जब घर की विकास होगी तो हमारी समाज की विकास होगी , समाज की विकास होगी तो हमारी देश की । इसीलिए हमे देश को विकसित बनाना है तो , हर लड़की को पढ़ाना हैं । कहा जाता है जहाँ नारी की इज्ज़त होती वहाँ भगवान का वास होता हैं । नारी तो देवी  होती हैं । फिर भी लक्ष्मी (पैसों ) के लिए के दुसरे पर निर्भर रहती हैं । नारी में तो इतनी ताकत होती हैं , जिसके सामने यमराज भी झुक गए हैं । लेकिन आज वही नारी हमारी घर मे हर रोज दुख सहती हैं । हर नारी  स्वतंत्र रहने का अधिकारी हैं । हर हिस्से में बराबर की हकदारी हैं । फिर समाजो के रूढिवादी परम्परा के कारण बहुत कठिनाई झेलनी पर रही । लेकिन कबतक हम औरतों जुल्म सहे अब समय आ गया है । अपनी ताकत का उपयोग कर सभी महिलाएं अपनी लक्ष्य को पूरा करे ।और अगर कोई पुरूष बीच मे आते हैं । उसे उनकी भाषा मे जवाब देने की । 


धन्यवाद

विरार ( महाराष्ट्र )

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